छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में अवैध रेत खनन का मुद्दा एक बार फिर गंभीर राजनीतिक और प्रशासनिक बहस के केंद्र में आ गया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) चीफ दीपक बैज द्वारा लगातार उठाए जा रहे सवालों के बीच अब शंख नदी से जुड़े अवैध खनन नेटवर्क की तस्वीरें और आरोप स्थानीय स्तर पर बड़ा विवाद खड़ा कर रहे हैं। आरोप है कि छत्तीसगढ़ और झारखंड की अंतर्राज्यीय सीमा से सटे इलाकों में रेत माफियाओं का संगठित गिरोह सक्रिय है, जो शंख नदी के प्राकृतिक स्वरूप को गंभीर नुकसान पहुंचाते हुए बड़े पैमाने पर अवैध उत्खनन कर रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पूरा नेटवर्क सिर्फ खनन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें रेत के भंडारण और उसके अवैध परिवहन की पूरी श्रृंखला शामिल है, जो बिना किसी रोक-टोक के संचालित हो रही है।
सूत्रों और स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार लोदाम थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम पुत्रीचैरा में हालात सबसे अधिक चिंताजनक बताए जा रहे हैं। यहां कटनी–गुमला राष्ट्रीय राजमार्ग से लेकर गौठान और सरकारी जमीनों तक रेत माफियाओं का कथित कब्जा दिखाई देता है। ग्रामीणों का आरोप है कि शंख नदी से दिन और रात अवैध तरीके से रेत निकाली जा रही है और उसे खुलेआम बड़े-बड़े ढेरों के रूप में स्टॉक किया जा रहा है, जिससे कई स्थानों पर रेत के विशाल पहाड़ जैसे ढांचे बन गए हैं। यह स्थिति न केवल पर्यावरणीय असंतुलन को दर्शाती है, बल्कि नदी तंत्र के अस्तित्व पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।
स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि अवैध खनन के खिलाफ आवाज उठाना अब बेहद जोखिम भरा हो गया है। आरोप है कि रेत माफिया से जुड़े लोग धमकियों के जरिए ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों को डराने का काम कर रहे हैं, जिससे विरोध की आवाजें दब जाती हैं। कुछ लोगों ने दबी जुबान में यह भी बताया कि विरोध करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी जाती है, जिसके कारण कई जनप्रतिनिधि भी खुलकर सामने आने से बच रहे हैं। इस तरह के आरोप क्षेत्र में भय और असुरक्षा के माहौल की ओर इशारा करते हैं।
मामले को और गंभीर बनाता है यह तथ्य कि अवैध खनन का यह पूरा नेटवर्क कथित तौर पर प्रशासनिक निगरानी के बावजूद सक्रिय है। स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठाया जा रहा है कि आखिर कैसे राष्ट्रीय राजमार्ग और सरकारी जमीनों के आसपास इतने बड़े पैमाने पर रेत का भंडारण लंबे समय तक बिना कार्रवाई के चलता रहा। ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित विभागों की निष्क्रियता या लापरवाही के कारण माफियाओं के हौसले लगातार बढ़ते जा रहे हैं और वे बिना किसी डर के दिनदहाड़े गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं।
राजनीतिक स्तर पर भी यह मुद्दा गरमाता जा रहा है। विपक्ष द्वारा लगातार यह आरोप लगाया जा रहा है कि राज्य में अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण नहीं है, जबकि सरकार की ओर से कार्रवाई के दावे किए जाते रहे हैं। दीपक बैज द्वारा उठाए गए सवालों ने इस विवाद को और अधिक सार्वजनिक विमर्श में ला दिया है, जहां प्रशासनिक जवाबदेही और कानून व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शंख नदी जैसे संवेदनशील जल स्रोतों से इस प्रकार अवैध उत्खनन जारी रहा, तो इसका सीधा असर न केवल पर्यावरण पर पड़ेगा, बल्कि स्थानीय जल स्तर और कृषि व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है। नदी के प्राकृतिक प्रवाह में बाधा और अवैध खनन से होने वाला कटाव भविष्य में बड़े भू-परिवर्तन का कारण बन सकता है।
फिलहाल, पूरे मामले को लेकर प्रशासनिक स्तर पर स्थिति स्पष्ट नहीं है, लेकिन स्थानीय स्तर पर बढ़ते दबाव और राजनीतिक बयानबाजी के बीच उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही इस अवैध खनन नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई देखने को मिल सकती है। वहीं ग्रामीण अब भी स्थायी समाधान और प्रभावी निगरानी व्यवस्था की मांग कर रहे हैं, ताकि शंख नदी और आसपास के क्षेत्रों में कानून का शासन बहाल हो सके और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।


