अवैध खनन से बदला नदियों का रास्ता, पूर्व चीफ इंजीनियर अमरजीत सिंह ने जताई चिंता; SYL विवाद पर नए सिरे से आकलन की मांग

Date:


भाखड़ा बांध को लेकर फिलहाल घबराने जैसी कोई स्थिति नहीं है। हालांकि सरकार और प्रशासन को मानसून के मद्देनजर सभी जरूरी तैयारियां समय रहते पूरी कर लेनी चाहिए।

भाखड़ा-ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (बीबीएमबी) द्वारा राज्यों से डैम का पानी लेने की अपील के बाद कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं, लेकिन वर्तमान हालात को देखते हुए इसे अलार्मिंग स्थिति नहीं कहा जा सकता।

यह बात जागरण विमर्श में ऑनलाइन शामिल हुए पंजाब सिंचाई विभाग से सेवानिवृत्त चीफ इंजीनियर अमरजीत सिंह दुलेट ने कही। अमरजीत सिंह ने कहा कि इस समय भाखड़ा बांध का जलस्तर उसकी पूर्ण क्षमता से करीब 115 फीट नीचे है। ऐसे में तत्काल बड़े खतरे की आशंका नहीं है।

बाढ़ जैसी परिस्थितियों से बचने के लिए जरूरी

हालांकि बाढ़ जैसी परिस्थितियों से बचने के लिए यह जरूरी है कि हर वर्ष मानसून शुरू होने से पहले नालों, नहरों, नदियों और तटबंधों की सफाई व मरम्मत का कार्य पूरी तरह संपन्न कर लिया जाए। जून के अंत तक संबंधित विभागों से इन कार्यों का अंतिम प्रमाणपत्र भी प्राप्त हो जाना चाहिए।

डैम को अधिक खाली रखने संबंधी सवाल पर दुलेट ने कहा कि बीबीएमबी की भूमिका केवल बाढ़ नियंत्रण तक सीमित नहीं है। उसका प्रमुख दायित्व जलविद्युत उत्पादन भी है। ऐसे में डैम को जरूरत से ज्यादा खाली रखना व्यावहारिक नहीं है।

यदि भविष्य में पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फ का पिघलना अपेक्षा से कम हुआ तो जल संकट की स्थिति भी पैदा हो सकती है। इसलिए जल प्रबंधन में संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। बीबीएमबी को संभावित परिस्थितियों के बारे में समय रहते राज्य सरकारों को सूचित करना चाहिए, ताकि प्रशासनिक स्तर पर पर्याप्त तैयारियां की जा सकें।

पूर्व चीफ इंजीनियर ने नदियों में बढ़ती तबाही के पीछे अवैध और अनियंत्रित खनन को भी एक बड़ा कारण बताया। उन्होंने कहा कि लगातार हो रही माइनिंग के कारण कई नदियों ने अपना प्राकृतिक मार्ग बदल लिया है। इससे बाढ़ के दौरान पानी नए क्षेत्रों में फैलता है और नुकसान बढ़ जाता है। साथ ही अत्यधिक खनन से तटबंध कमजोर पड़ जाते हैं, जिससे उनके टूटने का खतरा भी बढ़ जाता है।

एसवाईएल पर नए सिरे से जल उपलब्धता का आकलन हो

सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर विवाद पर दुलेट ने कहा कि यह मुद्दा पिछले चार दशकों से चला आ रहा है, लेकिन इसका स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। एसवाईएल की मूल नीति उस समय बनाई गई थी जब नदियों में पानी का प्रवाह आज की तुलना में काफी अधिक था।

अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं और नदियों में इनफ्लो कम हुआ है। ऐसे में जल उपलब्धता का नए सिरे से वैज्ञानिक आकलन किया जाना चाहिए। यदि वर्तमान परिस्थितियों के आधार पर आकलन किया जाए तो इस विवाद की वास्तविक स्थिति स्वयं स्पष्ट हो जाएगी और समाधान का रास्ता भी आसान हो सकता है।


CHANDIGARH MEDIA
CHANDIGARH MEDIAhttp://www.chandigarhmedia.com
In the wake of today's technologically driven world, people are effectively coping with the digitalized scenario. The need to spare long hours for updating oneself with whatever is happening around, has completely disappeared. An enormous hub of latest news and information is available in seconds, till the time you blink an eye, only on CHANDIGARH MEDIA. Although the internet is flooded with numerous e-newspapers, it is difinitely hard to beat CHANDIGARH HELPLINE group. You just need to join CHANDIGARH MEDIA on facebook, instagram, Youtube, Twitter or whatsapp and undoubtedly you'll be the first one with the latest news among your peers. Another positive aspect of this group is that you can also forward your promotions and become familiar among a fan base of around 30k people. So guys halt for a second and go follow CHANDIGARH MEDIA AND CHANDIGARH HELPLINE!

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related

Father and son kill man; the reason will leave you shocked

A 38-year-old man was allegedly attacked and killed with...

Youth Dies Under Suspicious Circumstances in Kapurthala Modern Jail; Family Creates Uproar

Harpreet Chahal, a young man incarcerated in Kapurthala Modern...

New Order from Punjab Government: Schools to Remain Open on July 11–12 Despite Holidays

The government has issued a significant administrative order regarding...
error: Content is protected !!