छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय परिसर शुक्रवार को चिकित्सकों के बड़े विरोध-प्रदर्शन का केंद्र बन गया, जब जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन और छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन के संयुक्त आह्वान पर हजारों डॉक्टरों ने कैंडल मार्च निकालकर अपनी लंबित मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। इस शांतिपूर्ण लेकिन व्यापक आंदोलन में इंटर्न, पीजी रेजिडेंट, सीनियर रेजिडेंट से लेकर सुपरस्पेशलिटी डॉक्टर तक बड़ी संख्या में शामिल हुए, जिससे चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े असंतोष की गंभीर तस्वीर सामने आई।
कैंडल मार्च के दौरान चिकित्सकों ने हाथों में मोमबत्तियां और अपनी मांगों से संबंधित बैनर-पोस्टर लेकर परिसर में मार्च किया और सरकार तथा स्वास्थ्य विभाग तक अपनी आवाज पहुंचाने का प्रयास किया। डॉक्टरों का कहना था कि यह आंदोलन केवल वेतन या स्टाइपेंड वृद्धि का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह पूरे राज्य के चिकित्सा ढांचे, स्थानीय डॉक्टरों के भविष्य और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता से जुड़ा एक गंभीर प्रश्न है। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि उनकी मांगों को लंबे समय तक अनसुना किया जाता रहा तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
डॉक्टरों की प्रमुख मांगों में इंटर्न, पीजी और सीनियर रेजिडेंट के स्टाइपेंड में सम्मानजनक वृद्धि, सुपरस्पेशलिटी कैडर का गठन तथा राज्य के बाहर से मेडिकल प्रोफेशनल्स की आउटसोर्सिंग से जुड़े फैसलों को वापस लेना शामिल है। चिकित्सकों का आरोप है कि बाहरी राज्यों से डॉक्टरों की तैनाती या आउटसोर्सिंग के निर्णय से स्थानीय युवा डॉक्टरों के रोजगार और करियर अवसरों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। इसी वजह से डॉक्टरों में नाराजगी और असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है।
प्रदर्शन में शामिल चिकित्सकों ने यह भी कहा कि स्वास्थ्य विभाग की हालिया नीतियों से स्थानीय डॉक्टरों के भविष्य को लेकर अनिश्चितता की स्थिति पैदा हो गई है। उनका मानना है कि यदि राज्य में उपलब्ध प्रतिभाशाली चिकित्सकों को उचित अवसर और सम्मान नहीं दिया गया, तो इसका सीधा प्रभाव स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर भी पड़ेगा। डॉक्टरों ने जोर देकर कहा कि उनकी लड़ाई केवल आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य व्यवस्था के भविष्य को सुरक्षित रखने की लड़ाई है।
कैंडल मार्च के दौरान परिसर में लगातार नारेबाजी होती रही। डॉक्टरों ने “हमारा हक, हमारी आवाज, हमारा भविष्य”, “सेव लोकल डॉक्टर्स, सेव आवर फ्यूचर” और “रिस्पेक्ट आवर वर्क, रिस्पेक्ट आवर राइट्स” जैसे नारों के माध्यम से अपनी एकजुटता और असंतोष को व्यक्त किया। शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित इस प्रदर्शन में डॉक्टरों ने प्रतीकात्मक रूप से सरकार को संदेश देने की कोशिश की कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था और चिकित्सा शिक्षा से जुड़े नीति-निर्धारण पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर जहां सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और सुधार के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर चिकित्सकों के इस संगठित विरोध ने यह संकेत दिया है कि जमीनी स्तर पर कई मुद्दे अब भी अनसुलझे हैं। डॉक्टरों की यह एकजुटता आने वाले समय में स्वास्थ्य नीति और प्रशासनिक निर्णयों पर दबाव बढ़ा सकती है।


